विश्व

परमाणु जोखिम: शीत युद्ध के बाद सबसे खतरनाक दौर में दुनिया, UN प्रमुख की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने परमाणु हथियारों के बढ़ते भंडार, तीखी बयानबाजी और कमजोर होती हथियार नियंत्रण व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता जताई है।

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न्यूयॉर्क, 29 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने 29 सितंबर 2026 को चेताया कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, परमाणु शस्त्रागार के विस्तार और हथियार नियंत्रण व्यवस्थाओं के कमजोर पड़ने से दुनिया शीत युद्ध की समाप्ति के बाद के सबसे खतरनाक परमाणु दौर में पहुंच गई है।

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परमाणु जोखिम पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव, परमाणु हथियारों के विस्तार और नियंत्रण व्यवस्थाओं के कमजोर पड़ने के बीच दुनिया शीत युद्ध की समाप्ति के बाद के सबसे खतरनाक परमाणु दौर में पहुंच गई है। उन्होंने देशों से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को रोकने, संवाद बहाल करने और निरस्त्रीकरण की दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील की।

हथियार भंडार और नियंत्रण व्यवस्था पर चिंता

गुतारेस ने 29 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की उस उच्चस्तरीय बैठक में यह बात कही, जो परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित हुई। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उन्होंने चेताया कि परमाणु शस्त्रागार बढ़ रहे हैं, परमाणु बयानबाजी अधिक आक्रामक हो रही है और दशकों में तैयार की गई सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।

वैश्विक भंडार में फिर बढ़ोतरी की आशंका

महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने कहा कि जनवरी 2026 तक दुनिया में 12,000 से अधिक परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें करीब 2,100 से 2,200 हथियार उच्च परिचालन तैयारियों की स्थिति में रखे गए हैं। उनके मुताबिक, शीत युद्ध के बाद पहली बार वैश्विक परमाणु भंडार में फिर बढ़ोतरी की आशंका है, क्योंकि नए और अधिक आधुनिक हथियारों का निर्माण पुराने हथियारों को हटाए जाने की गति से तेज है।

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न्यू START के बाद बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु जोखिम से जुड़े कई घटनाक्रमों को गंभीर बताया। अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक हथियारों पर लागू न्यू START संधि 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई। इसके बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु शस्त्रागार पर कोई बाध्यकारी सीमा लागू नहीं रही। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर क्षण बताया था।

नई तकनीकों से जुड़ा अतिरिक्त खतरा

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर यह भी कहा गया कि परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिम अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर क्षमताओं और उन्नत मिसाइल प्रणालियों जैसी तकनीकों से और जटिल हो रहे हैं। नियंत्रण और निर्णय-प्रक्रिया में किसी त्रुटि, गलत आकलन या बढ़ते सैन्य टकराव का असर व्यापक हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र का समाधान: संवाद और निरस्त्रीकरण

गुतारेस ने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण कोई राजनीतिक उपकार नहीं, बल्कि देशों की बाध्यकारी कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने परमाणु हथियार रखने वाले देशों से संवाद बहाल करने, हथियारों की सुरक्षा-व्यवस्थाएं मजबूत करने, परमाणु हथियारों की भूमिका घटाने और किसी भी परिस्थिति में इनके इस्तेमाल को रोकने का आह्वान किया।

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