नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026
भारतीय रिजर्व बैंक के अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त को समाप्त पखवाड़े में गैर-खाद्य बैंक ऋण सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़ा। सेवा क्षेत्र 24.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे तेज बढ़ने वाला प्रमुख खंड रहा, जबकि उद्योग और कृषि ऋण में भी मजबूत विस्तार दर्ज किया गया।
गैर-खाद्य बैंक ऋण में 18.8 प्रतिशत वृद्धि
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 31 अगस्त 2026 को समाप्त पखवाड़े में गैर-खाद्य बैंक ऋण सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़ा। एक साल पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 10.2 प्रतिशत थी।
आरबीआई ने यह आंकड़ा 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से जुटाया है। ये बैंक सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल गैर-खाद्य ऋण का करीब 95 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।
कृषि और उद्योग क्षेत्र में ऋण विस्तार
कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए बैंक ऋण में सालाना 17.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में इस क्षेत्र की ऋण वृद्धि 7.6 प्रतिशत थी।
उद्योग क्षेत्र को बैंक ऋण 18.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष यह वृद्धि 7 प्रतिशत रही थी। बड़े और मध्यम उद्योगों की ऋण वृद्धि तेज हुई, वहीं सूक्ष्म और लघु उद्योगों में भी विस्तार बना रहा।
इन औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत बढ़ोतरी
आरबीआई के मुताबिक बुनियादी ढांचा, इंजीनियरिंग, मूल धातु और धातु उत्पाद, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, निर्माण तथा पेट्रोलियम और कोयला उत्पाद से जुड़े उद्योगों में ऋण वृद्धि मजबूत रही।
सेवा क्षेत्र ऋण वृद्धि में सबसे आगे
सेवा क्षेत्र में बैंक ऋण 24.3 प्रतिशत बढ़ा। पिछले वर्ष इसी अवधि में इस क्षेत्र की वृद्धि 10.3 प्रतिशत थी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, व्यापार, पेशेवर सेवाओं और वाणिज्यिक रियल एस्टेट को मिले ऋण ने इस बढ़ोतरी को सहारा दिया।
व्यक्तिगत ऋण में भी दोहरे अंक की वृद्धि
व्यक्तिगत ऋण खंड में सालाना 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि एक वर्ष पहले यह 11.9 प्रतिशत थी। आवास और वाहन ऋण में दोहरे अंक की वृद्धि बनी रही। इसके विपरीत क्रेडिट कार्ड बकाया और सोने के आभूषण के बदले दिए गए ऋण की वृद्धि दर धीमी पड़ी।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि आंकड़े अगस्त 2026 की अंतिम रिपोर्टिंग अवधि से संबंधित हैं। 31 दिसंबर 2025 से अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा में बदलाव के बाद मौजूदा वर्ष के आंकड़े महीने के अंतिम दिन के आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं।