लखनऊ | 30 सितंबर 2026
धनराज परिमल नाथवानी समाजवादी पार्टी के उस ‘सरप्राइज’ उम्मीदवार हैं, जिनके नाम ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी और खेल प्रशासक नाथवानी ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।
धनराज नाथवानी को लेकर बहस क्यों छिड़ी है
समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नाथवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। नाथवानी ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। उनका नाम सामने आने के बाद सपा के चयन और उनके कारोबारी संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।
कौन हैं धनराज परिमल नाथवानी
धनराज परिमल नाथवानी गुजरात से जुड़े कारोबारी और खेल प्रशासक हैं। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी के तौर पर काम करते हैं। सार्वजनिक परिचय में उन्हें रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक और समूह स्तर की जिम्मेदारियों से जुड़े व्यक्ति के रूप में बताया गया है।
परिवार और कारोबारी पृष्ठभूमि
नाथवानी का संबंध राज्यसभा सदस्य और उद्योगपति परिमल नाथवानी के परिवार से है। राज्यसभा के आधिकारिक दस्तावेज में परिमल नाथवानी के बेटे के रूप में धनराज नाथवानी का उल्लेख मिलता है। परिमल नाथवानी लंबे समय से कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और राज्यसभा में भी रह चुके हैं।
खेल प्रशासन में भूमिका
कारोबार के अलावा धनराज नाथवानी का नाम खेल प्रशासन से भी जुड़ा रहा है। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन से भी जुड़े रहे हैं। इसी वजह से उनका सार्वजनिक परिचय केवल कॉरपोरेट क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
राज्यसभा चुनाव का गणित
सपा ने नाथवानी को ऐसे समय उम्मीदवार बनाया है जब उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना है। पार्टी ने उनके साथ रामगोपाल यादव को भी उम्मीदवार बनाया है।
सपा के फैसले का राजनीतिक असर
नाथवानी का सपा से पारंपरिक संगठनात्मक जुड़ाव नहीं रहा है। इसी कारण उनके नाम को पार्टी के भीतर और विपक्षी दलों के बीच अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। सपा नेतृत्व ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर कारोबारी, खेल और सार्वजनिक जीवन के अनुभव वाले चेहरे को उच्च सदन की राजनीति में लाने का फैसला किया है।