अपराध

IIT बॉम्बे साहिल वाकोडे सुसाइड केस: प्रो. दुल्ला को डीन पद से हटाया, जाँच क्राइम ब्रांच को

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मुंबई | 21 सितम्बर 2026

IIT बॉम्बे के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद बढ़े विवाद के बीच संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) की जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह कार्रवाई तब हुई, जब छात्र कैंपस में विरोध कर रहे थे और मामले की निष्पक्ष जाँच तथा प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहे थे।

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साहिल के पिता की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने प्रो. दुल्ला और अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने जाँच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। आरोपों की सत्यता जाँच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

डीन की जिम्मेदारी से हटाया गया, शिक्षक पद पर कार्रवाई स्पष्ट नहीं

आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे की ओर से भेजे गए संदेश के अनुसार, प्रो. दुल्ला को उनकी डीन की प्रशासनिक जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से हटाया गया है। इसे उनके शिक्षक पद से निलंबन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; छात्र प्रतिनिधियों की मांग प्रो. दुल्ला के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की भी रही है। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के स्तर पर आगे की कार्रवाई पर विचार होना बाकी है।

इस अंतर को समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति को प्रशासनिक पद से हटाना और उसकी अकादमिक नियुक्ति पर कार्रवाई होना, दोनों अलग प्रक्रियाएँ हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जाँच और सक्षम कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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संस्थान ने पहले के बयान पर माफी मांगी

आईआईटी बॉम्बे ने छात्र की मौत के बाद जारी अपने पहले के बयान पर माफी मांगी है। संस्थान ने माना कि जाँच पूरी होने से पहले कुछ जानकारियों को सार्वजनिक करना उचित नहीं था। यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि मृतक छात्र अब अपना पक्ष रखने की स्थिति में नहीं है और उसके परिवार ने संस्थान के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मामले की शुरुआती जानकारी के अनुसार, साहिल पर मध्य-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के जरिए एआई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने का आरोप था। संस्थान ने इस घटनाक्रम को अपनी प्रारम्भिक प्रतिक्रिया में शामिल किया था। परिवार ने इसके बाद कथित जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए, जिन्हें संस्थान ने पहले नकारा था। अब इन दोनों पक्षों की जाँच क्राइम ब्रांच के सामने है।

कैंपस में विरोध, फैकल्टी फोरम ने भी रखा पक्ष

साहिल की मौत के बाद सैकड़ों छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया, जिसके कारण कुछ परीक्षाएँ स्थगित करनी पड़ीं। प्रदर्शनकारियों ने संवेदनशील मामलों में संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया, छात्र सहायता तंत्र और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

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दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रो. दुल्ला के समर्थन में कहा है कि उन्होंने परीक्षा संबंधी कथित अनियमितता को संस्थान की प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट किया था। ऐसे में यह मामला केवल एक व्यक्ति पर आरोप या समर्थन तक सीमित नहीं रह जाता; असली परीक्षा यह है कि जाँच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी पूर्वाग्रह के पूरी हो।

फिलहाल सबसे आवश्यक बात यही है कि परिवार को न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा मिले, छात्र समुदाय को स्पष्ट जवाब मिले और संस्थान किसी भी निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले तथ्यों तथा कानून—दोनों का सम्मान करे।

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