इंफाल, 17 सितंबर 2026
Manipur Violence के बीच तामेंगलोंग और नोनी में छह कुकी-जो नागरिकों की हत्या के बाद कांगपोकपी के चावांगकिनिंग नागा गांव पर रातभर हमला हुआ। दो घर जले, सीआरपीएफ ने करीब छह घंटे तक चली फायरिंग में गांव में घुसपैठ रोकी।
Manipur Violence: तामेंगलोंग-नोनी की हत्याओं के बाद कांगपोकपी में हमला
तामेंगलोंग और नोनी जिलों में पिछले कुछ दिनों में कुकी-जो नागरिकों की हत्याओं ने पुराने कुकी-नागा तनाव को फिर हिंसक मोड़ दे दिया है। 15 सितंबर को तामेंगलोंग के लीसांगफाई-मुक्तोखल इलाके में खेतों में काम कर रही दो महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे दो दिन पहले तामेंगलोंग और नोनी में अलग-अलग हमलों में चार अन्य कुकी-जो नागरिकों की मौत हुई थी।
इसके बाद 15-16 सितंबर की रात कांगपोकपी जिले के चावांगकिनिंग लियांगमाई नागा गांव पर भारी फायरिंग हुई। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में हथियारबंद हमलावरों ने रात करीब 10:30 बजे गांव को निशाना बनाया। पास तैनात सीआरपीएफ ने जवाबी फायरिंग की और गोलीबारी करीब छह घंटे तक चली। गांव के बाहरी हिस्से के दो लकड़ी के घर जला दिए गए, लेकिन सुरक्षाबलों ने हमलावरों को बस्ती में घुसने से रोक दिया।
क्या है नया कुकी-नागा एंगल?
इस ताजा दौर की खास बात यह है कि हिंसा अब केवल मैतेई-कुकी संघर्ष के दायरे में नहीं दिख रही। तामेंगलोंग, नोनी और कांगपोकपी के मिश्रित आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्रों में कुकी और नागा समुदायों के बीच अविश्वास खुलकर सामने आया है। कुकी संगठनों ने छह नागरिकों की हत्या के लिए नागा उग्रवादी समूहों पर आरोप लगाए हैं। सैकुल की कुकी विधायक ने लीसांगफाई हत्याकांड में एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ-के कैडरों की संलिप्तता का आरोप लगाया है।
दूसरी तरफ, चावांगकिनिंग गांव प्राधिकरण और लियांगमाई नागा संगठनों ने गांव पर हमले के लिए कुकी हथियारबंद समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है। ताजा घटनाक्रम ने उन इलाकों में तनाव बढ़ाया है जहां कुकी और नागा गांव एक-दूसरे के निकट हैं और सड़क संपर्क सीमित है।
नाकेबंदी से बाजार, स्कूल और इलाज प्रभावित
तनाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ है। कई पहाड़ी इलाकों में एक सप्ताह से स्कूल और बाजार बंद हैं तथा सड़क नाकेबंदी के कारण आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हुई है। कांगपोकपी के कुछ गांवों में चीनी 400 से 450 रुपये किलो तक बिकने की बात स्थानीय लोगों ने कही है। निजी वाहनों की आवाजाही जोखिमपूर्ण बनी हुई है और मरीजों को अस्पताल या एयरपोर्ट पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है।
मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 3 मई 2023 से जारी व्यापक जातीय हिंसा ने पहले ही राज्य को गहरे संकट में धकेला है। लेकिन फरवरी 2026 से पहाड़ी जिलों में उभरे कुकी-नागा तनाव ने सुरक्षा चुनौती को और जटिल बना दिया है। तामेंगलोंग, नोनी और कांगपोकपी की ताजा घटनाएं इसी नए तनाव-क्षेत्र की गंभीरता रेखांकित करती हैं।
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