कराची | 17 सितम्बर 2026
पाकिस्तान का कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार 11 सितम्बर को समाप्त सप्ताह में बढ़कर 26.79 अरब डॉलर हो गया। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह में भंडार में 3.07 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। यह करीब पांच वर्षों का सर्वोच्च स्तर है, लेकिन इस उछाल का बड़ा हिस्सा सरकार की नई विदेशी उधारी से आया है।
स्टेट बैंक के पास 21.39 अरब डॉलर का भंडार
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के पास मौजूद विदेशी मुद्रा भंडार सप्ताह के दौरान 3.06 अरब डॉलर बढ़कर 21.39 अरब डॉलर पर पहुंच गया। देश के वाणिज्यिक बैंकों के पास अलग से 5.40 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा थी। दोनों को मिलाकर पाकिस्तान का कुल तरल विदेशी मुद्रा भंडार 26.79 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
इससे पिछले सप्ताह कुल भंडार लगभग 23.72 अरब डॉलर था। यानी सात दिनों में इसमें करीब 13 प्रतिशत की असाधारण वृद्धि हुई।
तीन अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड से आया बड़ा उछाल
पाकिस्तानी मीडिया की आर्थिक रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रीय बैंक के भंडार में हुई अधिकांश वृद्धि सरकार के तीन अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड से प्राप्त रकम के कारण हुई। यूरोबॉन्ड अंतरराष्ट्रीय बाजार से लिया गया कर्ज होता है, जिसे तय अवधि के बाद ब्याज सहित लौटाना पड़ता है।
इसलिए भंडार का बढ़ना पाकिस्तान की बाहरी भुगतान क्षमता के लिए राहत जरूर है, लेकिन इसे केवल निर्यात, विदेशी निवेश या अर्थव्यवस्था की आंतरिक कमाई में हुई वृद्धि का परिणाम मानना सही नहीं होगा। नया विदेशी कर्ज तत्काल नकदी की स्थिति सुधारता है, पर उसके साथ भविष्य की देनदारी भी जुड़ती है।
बढ़ा भंडार पाकिस्तान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल आयात भुगतान, सरकारी विदेशी कर्ज चुकाने और मुद्रा बाजार में अचानक आने वाले दबाव से निपटने के लिए किया जाता है। पर्याप्त भंडार होने से पेट्रोलियम, गैस, खाद्य पदार्थ और औद्योगिक कच्चे माल जैसे जरूरी आयातों के भुगतान में जोखिम कम होता है।
मजबूत भंडार पाकिस्तानी रुपये पर दबाव सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है। जुलाई 2026 में एस&पी ग्लोबल ने आईएमएफ समर्थित सुधारों और बेहतर वित्तीय स्थिरता का हवाला देते हुए पाकिस्तान की दीर्घकालीन सॉवरेन रेटिंग ‘B-’ से बढ़ाकर ‘B’ की थी।
कर्ज और आईएमएफ पर निर्भरता अब भी बड़ी चुनौती
भंडार के पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बावजूद पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय स्थिति पूरी तरह जोखिममुक्त नहीं हुई है। देश सात अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष कार्यक्रम के तहत आर्थिक सुधार लागू कर रहा है। उसे आने वाले वर्षों में विदेशी कर्ज और ब्याज की बड़ी रकम भी चुकानी है।
पाकिस्तान चीन के साथ 30 अरब युआन की मुद्रा-विनिमय व्यवस्था का विस्तार चाहता है और अमेरिका से प्रस्तावित 10 अरब डॉलर की विनिमय-स्थिरीकरण सुविधा पर भी बातचीत कर रहा है। ये प्रयास बताते हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार को स्थायी स्तर पर बनाए रखने के लिए उसे अभी भी बाहरी वित्तीय सहायता और कर्ज के रोलओवर की जरूरत है।
असली परीक्षा विदेशी कमाई बढ़ाने की
26.79 अरब डॉलर का आंकड़ा पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण राहत है, खासकर उस देश के लिए जिसका केंद्रीय बैंक भंडार 2023 के भुगतान संकट के दौरान तीन अरब डॉलर के आसपास रह गया था। फिर भी अर्थव्यवस्था की स्थायी मजबूती का आकलन केवल भंडार के आकार से नहीं किया जा सकता।
आने वाले महीनों में यह देखना अधिक महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान निर्यात, प्रवासी नागरिकों से आने वाली धनराशि और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा पाता है या नहीं। यदि भंडार का आधार लगातार नए कर्ज और मित्र देशों की जमा राशि बने रहे, तो ऊंचा आंकड़ा राहत तो देगा, लेकिन बाहरी वित्तीय निर्भरता समाप्त नहीं करेगा।
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