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राजस्थान निकाय चुनाव 2026: BJP वोट शेयर में आगे, कांग्रेस से सिर्फ 0.94% का अंतर; जयपुर री-पोलिंग में कांग्रेस का क्लीन स्वीप

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Rajasthan Nikay Chunav 2026

जयपुर | 17 सितंबर 2026 — राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में सीटों की तस्वीर और वोट शेयर का गणित अलग-अलग कहानी कह रहा है। राज्यभर में BJP को 37,35,567 वोट मिले, जो 35.18% वोट शेयर है। कांग्रेस को 36,35,952 वोट यानी 34.24% वोट मिले। दोनों दलों के बीच अंतर केवल 99,615 वोट अथवा 0.94 प्रतिशत अंक का रहा।

निर्दलीय उम्मीदवारों ने 29,06,787 वोट लेकर 27.38% वोट शेयर हासिल किया। यह आंकड़ा बताता है कि स्थानीय उम्मीदवारों और बागियों की भूमिका इस चुनाव में बेहद प्रभावी रही।

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राज्यव्यापी पार्टीवार वोट शेयर

दल / विकल्पकुल वोटवोट शेयर
BJP37,35,56735.18%
कांग्रेस36,35,95234.24%
निर्दलीय29,06,78727.38%
NOTA1,09,5231.03%
RLP1,00,2770.94%
AAP49,8290.46%
CPI(M)34,1700.32%
BSP30,1790.28%
BAP14,1500.13%

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 री-पोलिंग के बाद क्या बदला?

जयपुर नगर निगम के चार वार्डों—9, 18, 25 और 34—में हुई री-पोलिंग में कांग्रेस ने सभी सीटें जीत लीं। इसके बाद 150 सदस्यीय निगम में BJP के 78, कांग्रेस के 57 और अन्य के 15 पार्षद हैं।

कोटा नगर निगम की तीन री-पोलिंग सीटों में BJP ने दो और कांग्रेस ने एक सीट जीती। अब कोटा में BJP के 57, कांग्रेस के 39 और निर्दलीय/अन्य के 4 पार्षद हैं।

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विश्व

परमाणु जोखिम: शीत युद्ध के बाद सबसे खतरनाक दौर में दुनिया, UN प्रमुख की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने परमाणु हथियारों के बढ़ते भंडार, तीखी बयानबाजी और कमजोर होती हथियार नियंत्रण व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता जताई है।

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UN nuclear disarmament meeting in New York

न्यूयॉर्क, 29 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने 29 सितंबर 2026 को चेताया कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, परमाणु शस्त्रागार के विस्तार और हथियार नियंत्रण व्यवस्थाओं के कमजोर पड़ने से दुनिया शीत युद्ध की समाप्ति के बाद के सबसे खतरनाक परमाणु दौर में पहुंच गई है।

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परमाणु जोखिम पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव, परमाणु हथियारों के विस्तार और नियंत्रण व्यवस्थाओं के कमजोर पड़ने के बीच दुनिया शीत युद्ध की समाप्ति के बाद के सबसे खतरनाक परमाणु दौर में पहुंच गई है। उन्होंने देशों से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को रोकने, संवाद बहाल करने और निरस्त्रीकरण की दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील की।

हथियार भंडार और नियंत्रण व्यवस्था पर चिंता

गुतारेस ने 29 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की उस उच्चस्तरीय बैठक में यह बात कही, जो परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित हुई। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उन्होंने चेताया कि परमाणु शस्त्रागार बढ़ रहे हैं, परमाणु बयानबाजी अधिक आक्रामक हो रही है और दशकों में तैयार की गई सुरक्षा व्यवस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।

वैश्विक भंडार में फिर बढ़ोतरी की आशंका

महासभा के अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने कहा कि जनवरी 2026 तक दुनिया में 12,000 से अधिक परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें करीब 2,100 से 2,200 हथियार उच्च परिचालन तैयारियों की स्थिति में रखे गए हैं। उनके मुताबिक, शीत युद्ध के बाद पहली बार वैश्विक परमाणु भंडार में फिर बढ़ोतरी की आशंका है, क्योंकि नए और अधिक आधुनिक हथियारों का निर्माण पुराने हथियारों को हटाए जाने की गति से तेज है।

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न्यू START के बाद बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु जोखिम से जुड़े कई घटनाक्रमों को गंभीर बताया। अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक हथियारों पर लागू न्यू START संधि 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई। इसके बाद दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु शस्त्रागार पर कोई बाध्यकारी सीमा लागू नहीं रही। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर क्षण बताया था।

नई तकनीकों से जुड़ा अतिरिक्त खतरा

संयुक्त राष्ट्र के मंच पर यह भी कहा गया कि परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिम अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर क्षमताओं और उन्नत मिसाइल प्रणालियों जैसी तकनीकों से और जटिल हो रहे हैं। नियंत्रण और निर्णय-प्रक्रिया में किसी त्रुटि, गलत आकलन या बढ़ते सैन्य टकराव का असर व्यापक हो सकता है।

संयुक्त राष्ट्र का समाधान: संवाद और निरस्त्रीकरण

गुतारेस ने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण कोई राजनीतिक उपकार नहीं, बल्कि देशों की बाध्यकारी कानूनी जिम्मेदारी है। उन्होंने परमाणु हथियार रखने वाले देशों से संवाद बहाल करने, हथियारों की सुरक्षा-व्यवस्थाएं मजबूत करने, परमाणु हथियारों की भूमिका घटाने और किसी भी परिस्थिति में इनके इस्तेमाल को रोकने का आह्वान किया।

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विश्व

धन कटौती से 83 लाख शरणार्थियों की सहायता पर संकट, UNHCR ने चेताया

वैश्विक धन कटौती से करीब 83 लाख शरणार्थियों और विस्थापित लोगों की जीवनरक्षक सहायता प्रभावित होने का खतरा है। UNHCR ने जरूरी सेवाओं पर बढ़ते दबाव की चेतावनी दी है।

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Refugee family receiving humanitarian aid

जिनेवा, 30 सितंबर 2026

वैश्विक मानवीय सहायता में धन की कमी से करीब 83 लाख शरणार्थियों, विस्थापितों और राज्यविहीन लोगों की जीवनरक्षक मदद पर संकट गहरा गया है। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी UNHCR ने चेताया है कि वित्तीय दबाव के कारण नकद सहायता, आश्रय, पानी, स्वास्थ्य और संरक्षण सेवाओं को सीमित करना पड़ रहा है।

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धन की कमी का असर जरूरी सेवाओं पर

UNHCR के अनुसार, सहायता में कमी का असर नकद मदद, आश्रय, पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाओं पर पड़ रहा है। एजेंसी ने कहा है कि संसाधनों की कमी के कारण कई कार्यक्रमों को सीमित करना पड़ा है और सहायता को सबसे गंभीर संकट वाले इलाकों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाया जा रहा है।

UNHCR के सामने बड़ी वित्तीय चुनौती

UNHCR के 2026 के वैश्विक आकलन के मुताबिक, एजेंसी को दुनिया भर में जबरन विस्थापित और राज्यविहीन लोगों की जरूरतों के लिए 10.632 अरब डॉलर की आवश्यकता है। एजेंसी ने कहा है कि मौजूदा वित्तीय दबावों के बीच सहायता कार्यक्रमों को चलाना कठिन हो रहा है।

निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर ज्यादा दबाव

UNHCR के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 4.16 करोड़ शरणार्थी थे। इनमें से करीब 68 प्रतिशत शरणार्थी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रह रहे हैं, जहां स्थानीय संसाधनों पर पहले से दबाव है।

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विश्व

UNGA81 जनरल डिबेट का समापन: शब्दों को सार्थक कार्रवाई में बदलने का आह्वान

UNGA81 की जनरल डिबेट के समापन पर महासभा अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने वैश्विक प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया।

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United Nations General Assembly closing debate

न्यूयॉर्क, 28 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक की जनरल डिबेट के समापन पर अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने सदस्य देशों से शांति, विकास और मानवाधिकारों पर व्यक्त प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। 28 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में दिए समापन वक्तव्य में उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद की असली परीक्षा इस बात से होगी कि सामूहिक फैसले जमीन पर कितनी वास्तविकता बदलते हैं।

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UNGA81 में शांति और नागरिक सुरक्षा पर जोर

संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक की जनरल डिबेट 22 से 28 सितंबर तक न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई। समापन सत्र में सदस्य देशों के वक्तव्यों से उभरे प्रमुख मुद्दों को रेखांकित करते हुए महासभा अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने कहा कि अब शब्दों को जमीन पर असर डालने वाली कार्रवाई में बदलना होगा।

छह दिनों की बहस में 194 प्रतिनिधिमंडलों ने महासभा को संबोधित किया। इनमें 113 राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष शामिल थे। अध्यक्ष के अनुसार, वक्तव्यों में सबसे अधिक दोहराया गया शब्द ‘शांति’ रहा, लेकिन इसे केवल दूर के लक्ष्य के बजाय संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े तत्काल दायित्व के रूप में पेश किया गया।

संघर्षों पर मानवीय सहायता और राजनीतिक समाधान की मांग

बहस के दौरान गाजा, रोहिंग्या समुदाय और मध्य पूर्व, यूक्रेन, सूडान तथा म्यांमार के संघर्षों में मानवीय पीड़ा का मुद्दा प्रमुख रहा। सदस्य देशों ने नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की पहुंच, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के आधार पर राजनीतिक समाधान की मांग रखी।

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महासभा अध्यक्ष ने कहा कि शांति और सुरक्षा का अर्थ केवल हिंसा रोकना नहीं है। इसके लिए संघर्षों की रोकथाम, मध्यस्थता, कूटनीति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है। उन्होंने सुरक्षा परिषद को अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम बनाने की आवश्यकता भी बताई।

विकास और जलवायु वित्त को लेकर चिंता

विकास के मुद्दे पर अध्यक्ष ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति ठहरी हुई है और समय तेजी से निकल रहा है। उन्होंने सेविला प्रतिबद्धता का पालन, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार, सुलभ वित्त, विकासशील देशों के लिए अधिक राजकोषीय गुंजाइश और उत्पादक क्षमता में निवेश की जरूरत बताई।

जलवायु संकट पर उन्होंने कहा कि आपदाएं विकास की वर्षों की उपलब्धियों को मिटा रही हैं और असमानता बढ़ा रही हैं। छोटे द्वीपीय विकासशील देशों, तटीय देशों और कम विकसित देशों के लिए अनुकूलन तथा लचीलापन केवल खर्च नहीं, बल्कि अस्तित्व से जुड़े विषय हैं।

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मानवाधिकार और डिजिटल क्षेत्र की नई चुनौतियां

मानवाधिकारों के संदर्भ में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी, अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत तथा प्रवासियों और शरणार्थियों की गरिमा का मुद्दा उठाया गया। अध्यक्ष ने कहा कि मानवाधिकारों की कसौटी उन परिस्थितियों में होती है, जब उनकी रक्षा करना कठिन हो।

डिजिटल क्षेत्र में भी अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने ऑनलाइन नफरत, भड़काऊ भाषा और स्वचालित तकनीकों के जरिये झूठे आख्यान फैलाने के जोखिमों पर चिंता जताई।

एआई और संस्थागत भरोसा बहस के केंद्र में

कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस बार की बहस के प्रमुख विषयों में रही। अध्यक्ष के अनुसार, चार वर्ष पहले केवल पांच प्रतिनिधिमंडलों ने एआई का उल्लेख किया था, जबकि इस वर्ष 128 प्रतिनिधिमंडलों ने इस विषय पर बात की। वक्ताओं ने सार्वजनिक सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और सतत विकास में एआई की क्षमता के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिमों को भी रेखांकित किया।

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अध्यक्ष ने कहा कि बहुपक्षवाद की सफलता का आकलन केवल प्रस्तावों और बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि सामूहिक कार्रवाई जमीन पर वास्तविकता बदलती है या नहीं। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही, समान प्रतिनिधित्व और परिणामों के जरिये संस्थागत भरोसा बहाल करने का आह्वान किया।

अब समितियों और वैश्विक प्रक्रियाओं में आगे बढ़ेगा काम

महासभा अध्यक्ष ने कहा कि जनरल डिबेट समाप्त होने के साथ काम खत्म नहीं हुआ है। आगे की प्रक्रिया समितियों, सीओपी31, सतत विकास लक्ष्य शिखर सम्मेलन और महासभा के अन्य मंचों पर जारी रहेगी। उन्होंने सदस्य देशों से शांति, सतत विकास, मानवाधिकार और तकनीकी बदलाव के क्षेत्र में ठोस प्रतिबद्धताओं को लागू करने की अपील की।

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दुनिया

दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में पायलटों के बीच हिंसा, सऊदी अरब में आपात लैंडिंग

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई उड़ान में कॉकपिट के भीतर पायलटों के बीच हिंसक घटना के बाद विमान ने सऊदी अरब के तबुक में आपात लैंडिंग की।

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Flydubai aircraft at airport

नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026

दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में 30 सितंबर 2026 को कॉकपिट के भीतर पायलटों के बीच हिंसक घटना हुई। एक पायलट पर चाकू से हमला किए जाने की सूचना के बाद विमान ने आपात संकेत भेजे और सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए गए।

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उड़ान के दौरान कॉकपिट में क्या हुआ?

फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 ने दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के दौरान विमान से पहले अवैध हस्तक्षेप से जुड़ा इमरजेंसी सिग्नल और बाद में सामान्य आपात संकेत भेजा गया। इस वजह से विमान के अपहरण की आशंका पैदा हुई और इजरायल ने लड़ाकू विमान रवाना किए।

इजरायली सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, घटना की वजह विमान के भीतर हुई झड़प थी। शुरुआती जानकारी में कहा गया कि कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच हाथापाई हुई। यात्रियों ने विमान में खून और अफरा-तफरी देखे जाने की बात कही।

विमान कहां उतरा और यात्रियों का क्या हुआ?

विमान ने अपना रास्ता बदलकर सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर आपात लैंडिंग की। विमान में करीब 180 लोग सवार थे और लैंडिंग के बाद सभी यात्री सुरक्षित बताए गए।

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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चालक दल और कुछ यात्रियों ने कॉकपिट में पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की। एक पायलट के दूसरे पायलट पर चाकू से हमला करने की जानकारी सामने आई है। घटना के कारणों और हमले के इरादे की जांच की जा रही है।

इजरायल ने लड़ाकू विमान क्यों भेजे?

फ्लाइट ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार विमान ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी उसकी ऊंचाई में तेज बदलाव दर्ज हुआ। इसके बाद विमान ने आपात संकेत जारी किए और तबुक की ओर मोड़ दिया गया।

इजरायली अधिकारियों ने घटना को लेकर सुरक्षा आकलन किया है। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद अपहरण की आशंका को खारिज किया गया, हालांकि कॉकपिट में हुई हिंसा और चाकू के इस्तेमाल की जांच जारी है।

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राजनीति

धनराज नाथवानी कौन हैं, जिनको लेकर सपा के राज्यसभा उम्मीदवार पर बहस छिड़ी है

धनराज परिमल नाथवानी कारोबारी और खेल प्रशासक हैं, जिन्हें समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।

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Dhanraj Nathwani Rajya Sabha nomination

लखनऊ | 30 सितंबर 2026

धनराज परिमल नाथवानी समाजवादी पार्टी के उस ‘सरप्राइज’ उम्मीदवार हैं, जिनके नाम ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी और खेल प्रशासक नाथवानी ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया।

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धनराज नाथवानी को लेकर बहस क्यों छिड़ी है

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नाथवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। नाथवानी ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया। उनका नाम सामने आने के बाद सपा के चयन और उनके कारोबारी संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

कौन हैं धनराज परिमल नाथवानी

धनराज परिमल नाथवानी गुजरात से जुड़े कारोबारी और खेल प्रशासक हैं। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कॉरपोरेट अधिकारी के तौर पर काम करते हैं। सार्वजनिक परिचय में उन्हें रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक और समूह स्तर की जिम्मेदारियों से जुड़े व्यक्ति के रूप में बताया गया है।

परिवार और कारोबारी पृष्ठभूमि

नाथवानी का संबंध राज्यसभा सदस्य और उद्योगपति परिमल नाथवानी के परिवार से है। राज्यसभा के आधिकारिक दस्तावेज में परिमल नाथवानी के बेटे के रूप में धनराज नाथवानी का उल्लेख मिलता है। परिमल नाथवानी लंबे समय से कॉरपोरेट क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और राज्यसभा में भी रह चुके हैं।

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खेल प्रशासन में भूमिका

कारोबार के अलावा धनराज नाथवानी का नाम खेल प्रशासन से भी जुड़ा रहा है। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन से भी जुड़े रहे हैं। इसी वजह से उनका सार्वजनिक परिचय केवल कॉरपोरेट क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

राज्यसभा चुनाव का गणित

सपा ने नाथवानी को ऐसे समय उम्मीदवार बनाया है जब उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना है। पार्टी ने उनके साथ रामगोपाल यादव को भी उम्मीदवार बनाया है।

सपा के फैसले का राजनीतिक असर

नाथवानी का सपा से पारंपरिक संगठनात्मक जुड़ाव नहीं रहा है। इसी कारण उनके नाम को पार्टी के भीतर और विपक्षी दलों के बीच अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। सपा नेतृत्व ने उन्हें उम्मीदवार बनाकर कारोबारी, खेल और सार्वजनिक जीवन के अनुभव वाले चेहरे को उच्च सदन की राजनीति में लाने का फैसला किया है।

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राजनीति

NICE रोड परियोजना: कुमारस्वामी का आरोप, फैसले से कर्नाटक को 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

एचडी कुमारस्वामी ने NICE रोड परियोजना की एलाइनमेंट और भूमि उपयोग में बदलाव को लेकर डीके शिवकुमार पर आरोप लगाए। शिवकुमार ने आरोपों को खारिज किया।

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HD Kumaraswamy at Bengaluru press conference

बेंगलुरु | 29 सितंबर 2026

NICE रोड परियोजना को लेकर केंद्रीय मंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि परियोजना की रूपरेखा में किए गए एक फैसले से राज्य को करीब 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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NICE रोड परियोजना में बदलाव पर क्या आरोप लगाए गए?

कुमारस्वामी ने कहा कि 1997 के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के बाद मंजूर परियोजना की मूल योजना से हटकर बदलाव किए गए। उनके अनुसार, 2004 में जब शिवकुमार शहरी विकास मंत्री और बेंगलुरु-मैसूरु इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्लानिंग अथॉरिटी के अध्यक्ष थे, तब परियोजना की एलाइनमेंट और भूमि उपयोग में परिवर्तन हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि टोल रोड के लिए तय जमीन का दायरा बढ़ाया गया और इंटरचेंज क्षेत्रों में जमीन के विकास तथा बिक्री का रास्ता खोला गया। कुमारस्वामी ने कहा कि इन बदलावों से निजी पक्षों को लाभ हुआ और राज्य के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।

कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री से इस मामले में कार्रवाई की मांग की। उन्होंने परियोजना से जुड़े दस्तावेज और भूमि रिकॉर्ड पेश करने का भी उल्लेख किया।

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शिवकुमार ने क्या जवाब दिया?

शिवकुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए कुमारस्वामी को संबंधित एजेंसियों के समक्ष शिकायत करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि उनकी संपत्तियों और आय की जांच पहले भी चुनाव आयोग, आयकर विभाग तथा प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियां कर चुकी हैं।

NICE परियोजना बेंगलुरु और मैसूरु के बीच प्रस्तावित बुनियादी ढांचा कॉरिडोर से जुड़ी पुरानी योजना है। भूमि आवंटन, एलाइनमेंट और डेवलपमेंट अधिकारों को लेकर यह परियोजना लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में विवाद का विषय रही है।

विवाद का राजनीतिक संदर्भ

कर्नाटक में यह विवाद ऐसे समय फिर उभरा है जब सरकार और विपक्ष बेंगलुरु की विकास योजनाओं, जमीन के इस्तेमाल और बड़े ढांचागत प्रोजेक्टों पर आमने-सामने हैं। कुमारस्वामी के आरोपों के बाद NICE रोड परियोजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

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अर्थव्यवस्था

RBI अंडरराइटिंग नीलामी: 1 अक्टूबर को ₹33,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री

RBI 1 अक्टूबर 2026 को ₹33,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री के लिए अंडरराइटिंग नीलामी कराएगा।

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RBI government securities auction

नई दिल्ली | 30 सितंबर 2026

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक 1 अक्टूबर 2026 को ₹33,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री के लिए अंडरराइटिंग नीलामी कराएगा। इस नीलामी में प्राथमिक डीलरों की न्यूनतम और अतिरिक्त अंडरराइटिंग प्रतिबद्धताएं तय की जाएंगी।

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₹33,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री

भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकारी प्रतिभूतियों की प्रस्तावित बिक्री के लिए प्राथमिक डीलरों की अंडरराइटिंग प्रतिबद्धताओं को तय करने वाली नीलामी 1 अक्टूबर 2026 को कराने की घोषणा की है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी बॉन्ड की बिक्री के दौरान बाजार में पर्याप्त भागीदारी और निर्गम की सफलता सुनिश्चित करना है।

चार प्रतिभूतियों की नीलामी

केंद्र सरकार 1 अक्टूबर को चार सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री या पुनर्बिक्री करेगी। इनमें 6.20% GS 2029 के लिए ₹9,000 करोड़, 6.57% GS 2033 के लिए ₹12,000 करोड़, 7.63% GS 2056 के लिए ₹9,000 करोड़ और 7.50% GS 2061 के लिए ₹3,000 करोड़ का नोटिफाइड अमाउंट शामिल है। कुल राशि ₹33,000 करोड़ है।

निपटान 5 अक्टूबर को

आरबीआई की अंडरराइटिंग व्यवस्था के तहत प्राथमिक डीलर न्यूनतम अंडरराइटिंग प्रतिबद्धता और अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी अंडरराइटिंग के लिए बोली लगाते हैं। नीलामी में तय शर्तों के अनुसार डीलरों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। सरकारी प्रतिभूतियों की वास्तविक बिक्री के लिए निपटान 5 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है।

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व्यवसाय

Treasury Bills auction result: RBI ने 91, 182 और 364 दिन के बिलों के नतीजे जारी किए

RBI ने 30 सितंबर 2026 की Treasury Bills नीलामी के नतीजे जारी किए। 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के बिलों की कट-ऑफ यील्ड क्रमशः 5.5199%, 5.9601% और 6.1798% रही।

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Treasury Bills auction result and RBI building

नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026

भारतीय रिजर्व बैंक ने 30 सितंबर 2026 को हुई Treasury Bills नीलामी का पूरा परिणाम जारी कर दिया है। 91-दिन, 182-दिन और 364-दिन के ट्रेजरी बिलों पर कट-ऑफ यील्ड क्रमशः 5.5199 प्रतिशत, 5.9601 प्रतिशत और 6.1798 प्रतिशत रही।

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Treasury Bills auction में कितनी राशि रखी गई थी?

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 91-दिन के ट्रेजरी बिल के लिए अधिसूचित राशि 9,000 करोड़ रुपये, 182-दिन के बिल के लिए 8,000 करोड़ रुपये और 364-दिन के बिल के लिए 7,000 करोड़ रुपये थी।

RBI auction result में यील्ड कितनी रही?

91-दिन के बिल पर कट-ऑफ यील्ड 5.5199 प्रतिशत, 182-दिन के बिल पर 5.9601 प्रतिशत और 364-दिन के बिल पर 6.1798 प्रतिशत रही। भारित औसत यील्ड क्रमशः 5.4902 प्रतिशत, 5.9373 प्रतिशत और 6.1705 प्रतिशत दर्ज की गई।

कितनी बोलियां स्वीकार की गईं?

प्रतिस्पर्धी बोली में 91-दिन के बिल के लिए 14,440.500 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं, जिनमें से 8,550 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए। 182-दिन के बिल के लिए 11,531.500 करोड़ रुपये की बोलियों में से 7,600 करोड़ रुपये और 364-दिन के बिल के लिए 18,010 करोड़ रुपये की बोलियों में से 6,650 करोड़ रुपये स्वीकार किए गए।

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Non-competitive bids का आवंटन

गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी में 91-दिन के बिल के लिए 950 करोड़ रुपये, 182-दिन के बिल के लिए 900 करोड़ रुपये और 364-दिन के बिल के लिए 750 करोड़ रुपये की बोलियां स्वीकार की गईं।

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व्यवसाय

बैंक क्रेडिट में तेज बढ़ोतरी, अगस्त 2026 में गैर-खाद्य ऋण 18.8% बढ़ा

RBI के अगस्त 2026 आंकड़ों में गैर-खाद्य बैंक ऋण 18.8 प्रतिशत बढ़ा। सेवा क्षेत्र ऋण में 24.3 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि दर्ज हुई।

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Indian bank credit growth chart

नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026

भारतीय रिजर्व बैंक के अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त को समाप्त पखवाड़े में गैर-खाद्य बैंक ऋण सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़ा। सेवा क्षेत्र 24.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे तेज बढ़ने वाला प्रमुख खंड रहा, जबकि उद्योग और कृषि ऋण में भी मजबूत विस्तार दर्ज किया गया।

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गैर-खाद्य बैंक ऋण में 18.8 प्रतिशत वृद्धि

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार 31 अगस्त 2026 को समाप्त पखवाड़े में गैर-खाद्य बैंक ऋण सालाना आधार पर 18.8 प्रतिशत बढ़ा। एक साल पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 10.2 प्रतिशत थी।

आरबीआई ने यह आंकड़ा 41 चुनिंदा अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से जुटाया है। ये बैंक सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल गैर-खाद्य ऋण का करीब 95 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं।

कृषि और उद्योग क्षेत्र में ऋण विस्तार

कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए बैंक ऋण में सालाना 17.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में इस क्षेत्र की ऋण वृद्धि 7.6 प्रतिशत थी।

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उद्योग क्षेत्र को बैंक ऋण 18.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पिछले वर्ष यह वृद्धि 7 प्रतिशत रही थी। बड़े और मध्यम उद्योगों की ऋण वृद्धि तेज हुई, वहीं सूक्ष्म और लघु उद्योगों में भी विस्तार बना रहा।

इन औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत बढ़ोतरी

आरबीआई के मुताबिक बुनियादी ढांचा, इंजीनियरिंग, मूल धातु और धातु उत्पाद, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, निर्माण तथा पेट्रोलियम और कोयला उत्पाद से जुड़े उद्योगों में ऋण वृद्धि मजबूत रही।

सेवा क्षेत्र ऋण वृद्धि में सबसे आगे

सेवा क्षेत्र में बैंक ऋण 24.3 प्रतिशत बढ़ा। पिछले वर्ष इसी अवधि में इस क्षेत्र की वृद्धि 10.3 प्रतिशत थी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, व्यापार, पेशेवर सेवाओं और वाणिज्यिक रियल एस्टेट को मिले ऋण ने इस बढ़ोतरी को सहारा दिया।

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व्यक्तिगत ऋण में भी दोहरे अंक की वृद्धि

व्यक्तिगत ऋण खंड में सालाना 16.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि एक वर्ष पहले यह 11.9 प्रतिशत थी। आवास और वाहन ऋण में दोहरे अंक की वृद्धि बनी रही। इसके विपरीत क्रेडिट कार्ड बकाया और सोने के आभूषण के बदले दिए गए ऋण की वृद्धि दर धीमी पड़ी।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि आंकड़े अगस्त 2026 की अंतिम रिपोर्टिंग अवधि से संबंधित हैं। 31 दिसंबर 2025 से अंतिम रिपोर्टिंग पखवाड़े की परिभाषा में बदलाव के बाद मौजूदा वर्ष के आंकड़े महीने के अंतिम दिन के आधार पर दर्ज किए जा रहे हैं।

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अपराध

IIT बॉम्बे साहिल वाकोडे सुसाइड केस: प्रो. दुल्ला को डीन पद से हटाया, जाँच क्राइम ब्रांच को

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IIT बॉम्बे साहिल वाकोडे सुसाइड केस

मुंबई | 21 सितम्बर 2026

IIT बॉम्बे के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद बढ़े विवाद के बीच संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) की जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह कार्रवाई तब हुई, जब छात्र कैंपस में विरोध कर रहे थे और मामले की निष्पक्ष जाँच तथा प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहे थे।

साहिल के पिता की शिकायत पर मुंबई पुलिस ने प्रो. दुल्ला और अन्य के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने जाँच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। आरोपों की सत्यता जाँच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।

डीन की जिम्मेदारी से हटाया गया, शिक्षक पद पर कार्रवाई स्पष्ट नहीं

आईआईटी बॉम्बे के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे की ओर से भेजे गए संदेश के अनुसार, प्रो. दुल्ला को उनकी डीन की प्रशासनिक जिम्मेदारी से तत्काल प्रभाव से हटाया गया है। इसे उनके शिक्षक पद से निलंबन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए; छात्र प्रतिनिधियों की मांग प्रो. दुल्ला के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की भी रही है। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के स्तर पर आगे की कार्रवाई पर विचार होना बाकी है।

इस अंतर को समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति को प्रशासनिक पद से हटाना और उसकी अकादमिक नियुक्ति पर कार्रवाई होना, दोनों अलग प्रक्रियाएँ हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जाँच और सक्षम कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

संस्थान ने पहले के बयान पर माफी मांगी

आईआईटी बॉम्बे ने छात्र की मौत के बाद जारी अपने पहले के बयान पर माफी मांगी है। संस्थान ने माना कि जाँच पूरी होने से पहले कुछ जानकारियों को सार्वजनिक करना उचित नहीं था। यह बात इसलिए भी अहम है क्योंकि मृतक छात्र अब अपना पक्ष रखने की स्थिति में नहीं है और उसके परिवार ने संस्थान के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

मामले की शुरुआती जानकारी के अनुसार, साहिल पर मध्य-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के जरिए एआई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने का आरोप था। संस्थान ने इस घटनाक्रम को अपनी प्रारम्भिक प्रतिक्रिया में शामिल किया था। परिवार ने इसके बाद कथित जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए, जिन्हें संस्थान ने पहले नकारा था। अब इन दोनों पक्षों की जाँच क्राइम ब्रांच के सामने है।

कैंपस में विरोध, फैकल्टी फोरम ने भी रखा पक्ष

साहिल की मौत के बाद सैकड़ों छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया, जिसके कारण कुछ परीक्षाएँ स्थगित करनी पड़ीं। प्रदर्शनकारियों ने संवेदनशील मामलों में संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया, छात्र सहायता तंत्र और जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने प्रो. दुल्ला के समर्थन में कहा है कि उन्होंने परीक्षा संबंधी कथित अनियमितता को संस्थान की प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट किया था। ऐसे में यह मामला केवल एक व्यक्ति पर आरोप या समर्थन तक सीमित नहीं रह जाता; असली परीक्षा यह है कि जाँच निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी पूर्वाग्रह के पूरी हो।

फिलहाल सबसे आवश्यक बात यही है कि परिवार को न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा मिले, छात्र समुदाय को स्पष्ट जवाब मिले और संस्थान किसी भी निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले तथ्यों तथा कानून—दोनों का सम्मान करे।

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