न्यूयॉर्क, 28 सितंबर 2026
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक की जनरल डिबेट के समापन पर अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने सदस्य देशों से शांति, विकास और मानवाधिकारों पर व्यक्त प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्रवाई में बदलने का आह्वान किया। 28 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में दिए समापन वक्तव्य में उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद की असली परीक्षा इस बात से होगी कि सामूहिक फैसले जमीन पर कितनी वास्तविकता बदलते हैं।
UNGA81 में शांति और नागरिक सुरक्षा पर जोर
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक की जनरल डिबेट 22 से 28 सितंबर तक न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हुई। समापन सत्र में सदस्य देशों के वक्तव्यों से उभरे प्रमुख मुद्दों को रेखांकित करते हुए महासभा अध्यक्ष खलीलुर रहमान ने कहा कि अब शब्दों को जमीन पर असर डालने वाली कार्रवाई में बदलना होगा।
छह दिनों की बहस में 194 प्रतिनिधिमंडलों ने महासभा को संबोधित किया। इनमें 113 राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष शामिल थे। अध्यक्ष के अनुसार, वक्तव्यों में सबसे अधिक दोहराया गया शब्द ‘शांति’ रहा, लेकिन इसे केवल दूर के लक्ष्य के बजाय संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े तत्काल दायित्व के रूप में पेश किया गया।
संघर्षों पर मानवीय सहायता और राजनीतिक समाधान की मांग
बहस के दौरान गाजा, रोहिंग्या समुदाय और मध्य पूर्व, यूक्रेन, सूडान तथा म्यांमार के संघर्षों में मानवीय पीड़ा का मुद्दा प्रमुख रहा। सदस्य देशों ने नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की पहुंच, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के आधार पर राजनीतिक समाधान की मांग रखी।
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि शांति और सुरक्षा का अर्थ केवल हिंसा रोकना नहीं है। इसके लिए संघर्षों की रोकथाम, मध्यस्थता, कूटनीति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान तथा अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है। उन्होंने सुरक्षा परिषद को अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम बनाने की आवश्यकता भी बताई।
विकास और जलवायु वित्त को लेकर चिंता
विकास के मुद्दे पर अध्यक्ष ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति ठहरी हुई है और समय तेजी से निकल रहा है। उन्होंने सेविला प्रतिबद्धता का पालन, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार, सुलभ वित्त, विकासशील देशों के लिए अधिक राजकोषीय गुंजाइश और उत्पादक क्षमता में निवेश की जरूरत बताई।
जलवायु संकट पर उन्होंने कहा कि आपदाएं विकास की वर्षों की उपलब्धियों को मिटा रही हैं और असमानता बढ़ा रही हैं। छोटे द्वीपीय विकासशील देशों, तटीय देशों और कम विकसित देशों के लिए अनुकूलन तथा लचीलापन केवल खर्च नहीं, बल्कि अस्तित्व से जुड़े विषय हैं।
मानवाधिकार और डिजिटल क्षेत्र की नई चुनौतियां
मानवाधिकारों के संदर्भ में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी, अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत तथा प्रवासियों और शरणार्थियों की गरिमा का मुद्दा उठाया गया। अध्यक्ष ने कहा कि मानवाधिकारों की कसौटी उन परिस्थितियों में होती है, जब उनकी रक्षा करना कठिन हो।
डिजिटल क्षेत्र में भी अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने ऑनलाइन नफरत, भड़काऊ भाषा और स्वचालित तकनीकों के जरिये झूठे आख्यान फैलाने के जोखिमों पर चिंता जताई।
एआई और संस्थागत भरोसा बहस के केंद्र में
कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस बार की बहस के प्रमुख विषयों में रही। अध्यक्ष के अनुसार, चार वर्ष पहले केवल पांच प्रतिनिधिमंडलों ने एआई का उल्लेख किया था, जबकि इस वर्ष 128 प्रतिनिधिमंडलों ने इस विषय पर बात की। वक्ताओं ने सार्वजनिक सेवाओं, वैज्ञानिक अनुसंधान और सतत विकास में एआई की क्षमता के साथ-साथ उससे जुड़े जोखिमों को भी रेखांकित किया।
अध्यक्ष ने कहा कि बहुपक्षवाद की सफलता का आकलन केवल प्रस्तावों और बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि सामूहिक कार्रवाई जमीन पर वास्तविकता बदलती है या नहीं। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही, समान प्रतिनिधित्व और परिणामों के जरिये संस्थागत भरोसा बहाल करने का आह्वान किया।
अब समितियों और वैश्विक प्रक्रियाओं में आगे बढ़ेगा काम
महासभा अध्यक्ष ने कहा कि जनरल डिबेट समाप्त होने के साथ काम खत्म नहीं हुआ है। आगे की प्रक्रिया समितियों, सीओपी31, सतत विकास लक्ष्य शिखर सम्मेलन और महासभा के अन्य मंचों पर जारी रहेगी। उन्होंने सदस्य देशों से शांति, सतत विकास, मानवाधिकार और तकनीकी बदलाव के क्षेत्र में ठोस प्रतिबद्धताओं को लागू करने की अपील की।