नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026
यमन में बढ़ती हिंसा और बड़े पैमाने पर विस्थापन ने पहले से कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि भीड़भाड़ वाले विस्थापन स्थलों, साफ पानी की कमी और बाधित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण हैजा, खसरा और दूसरी रोकथाम योग्य बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।
संघर्ष के बीच बीमारी का बढ़ता खतरा
संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 6 अगस्त 2026 से जारी हिंसा में 4,481 लोग हताहत हुए हैं, जिनमें 830 से अधिक लोगों की मौत हुई है। संघर्ष के कारण करीब 1.45 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे अस्थायी शिविरों और अन्य ठिकानों पर भीड़ बढ़ रही है।
WHO के मुताबिक, विस्थापन, साफ पानी और स्वच्छता की कमी तथा स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट से हैजा, खसरा और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। इस साल यमन में 7,784 संदिग्ध हैजा मामलों के साथ 22 मौतें दर्ज की गई हैं। खसरे के 22,000 से अधिक संदिग्ध मामलों और 128 मौतों की भी सूचना है।
अस्पतालों पर इलाज और राहत का दोहरा दबाव
WHO ने बताया कि यमन की करीब 60 प्रतिशत स्वास्थ्य सुविधाएं ही पूरी तरह काम कर रही हैं। कई अस्पतालों में चिकित्सा कर्मचारियों और संसाधनों को युद्ध में घायल लोगों के इलाज के लिए लगाया गया है। मारिब और रस अल-अराह के दो अस्पतालों में व्यापक आपात प्रसूति और नवजात देखभाल सेवाएं निलंबित की गई हैं।
WHO ने 10 गवर्नरेट में 40 स्वास्थ्य केंद्रों और कार्यालयों तक 59.3 मीट्रिक टन चिकित्सा सामग्री पहुंचाई है तथा विस्थापित आबादी वाले इलाकों में 20 से अधिक मोबाइल चिकित्सा दल तैनात किए हैं। लेकिन अदन स्थित गोदाम में कुछ जीवनरक्षक सामग्री का भंडार समाप्त हो चुका है।
विस्थापित परिवारों तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती
WHO ने कहा है कि यमन में हैजा पहले से मौजूद है और मौजूदा प्रकोप हालिया हिंसा से पहले शुरू हो चुका था। भीड़भाड़ वाले शिविरों में पानी और स्वच्छता की सीमित व्यवस्था बीमारी के प्रसार को तेज कर सकती है।
UNICEF के अनुसार, हालिया लड़ाई से पहले भी यमन में 1.22 करोड़ बच्चों को मानवीय सहायता की जरूरत थी। एजेंसी ने स्वास्थ्य और पोषण दलों, सुरक्षित पानी, स्वास्थ्य केंद्रों के सहयोग तथा बाल संरक्षण सेवाओं के जरिए आपात प्रतिक्रिया बढ़ाई है।
Related Credent TV coverage